CANCER DISEASE CAUSES SYMPTOMS PREVENTION AND TREATMENT IN HINDI
कैंसर एक जानलेवा बीमारी, जानिए क्या हैं लक्षण और बचाव के उपाय?
कैंसर आज दुनिया भर में मौत के बड़े कारणों में से एक है। हर साल कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस खतरनाक बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। यह दिन कैंसर के प्रति जागरुकता बढ़ाने, इसके बारे में जानकारी फैलाने और इस बीमारी से लड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों को मजबूत करने का एक खास मौका देता है। कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिससे जान भी जा सकती है। हालांकि समय पर इसकी पहचान और उपचार से इस बीमारी से बचा जा सकता है। कैंसर में शरीर में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और जब इन्हें मरना चाहिए, तब वे मर नहीं पाती। स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मानना है कि कैंसर का खतरा हर उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है, ऐसे में बचाव के प्रयास करते रहना जरूरी है। पूर्व में यह लाइलाज हुआ करता था, लेकिन आज के समय में कैंसर का इलाज संभव है।
Table Content
- इंट्रोडक्शन (हर साल 4 फरवरी, विश्व कैंसर दिवस)
- कैंसर क्या है?( What is cancer)
- 2025 में इतने बढ़े कैंसर के मामले
- कैंसर के स्टेज कितने होते हैं?
- वर्ल्ड कैंसर डे का इतिहास
- कैंसर के प्रकार
- कैंसर के मुख्य लक्षण
- कैंसर के सामान्य कारण
- कैंसर के लिए उपचार
- बचाव के उपाय
- कैंसर से लड़ने वाले 4 प्रभावी खाद्य पदार्थ
- कैंसर (Cancer) से संबंधित अकसर पूछे जाने वाले सवाल (FAQS)
- निष्कर्ष
कैंसर क्या है? (what is cancer?)
शरीर में होने वाली असामान्य और खतरनाक स्थिति, जिसमें कोशकाओं की असामान्य वृद्धि होती है। उसे कैंसर कहते हैं। मानव शरीर में कोशिकाओं का लगातार विभाजन होना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस पर शरीर का पूरा नियंत्रण रहता है। लेकिन जब किसी विशेष अंग की कोशिकाओं पर शरीर का नियंत्रण नहीं रहता है, तो वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती है, इसे कैंसर कहा जाता है। ज्यादातर कैंसर ट्यूमर के रूप में होते हैं। लेकिन ब्लड कैंसर के मामले में ट्यूमर नहीं होता है। हालांकि हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है।
2025 में इतने बढ़े कैंसर के मामले (Cancer cases will increase by this much in 2025)
देश में भी कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025 तक यह आंकड़ा 15.7 लाख तक पहुंच सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, यहां तक कि बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में कैंसर भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रमुख चुनौती बन गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के विशेषज्ञों का कहना है कि देश में कैंसर के मामलों में 12 से 18 प्रतिशत की वृद्धि होने की आशंका है। यह बीमारी दुनियाभर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर का मुख्य कारण हमारी दिनचर्या में शामिल बुरी आदतें हैं। लोग खान-पान में लापरवाही बरतते हैं, व्यायाम नहीं करते और प्रदूषण से बचाव के उपाय नहीं अपनाते। यही कारण है कि कम उम्र में भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। कैंसर का बढ़ता खतरा पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाकर लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जाता है। हमें पूरे साल सही जीवनशैली अपनाने, धूम्रपान जैसी हानिकारक आदतों से बचने और नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराने की जरूरत है। अगर हम छोटी-छोटी सावधानियां बरतें, तो न केवल खुद को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचा सकते हैं। सही जानकारी और सतर्कता से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। याद रखें, कैंसर से बचाव संभव है बस सही कदम उठाने की जरूरत है।
कैंसर के स्टेज कितने होते हैं? (Stages of Cancer)
कैंसर के ज्यादातर मामलों में ट्यूमर होता है और इन्हें गंभीरता के आधार पर चार स्टेज में बांटा गया है।
- स्टेज 0 : इस स्टेज में आपको कैंसर नहीं होता है लेकिन शरीर में कुछ असाधारण कोशिकाएं मौजूद हो सकती है, जो कभी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है।
- स्टेज 1 : प्रथम स्टेज में कैंसर का ट्यूमर छोटा होता है। इसमें कैंसर की कोशिकाएं सिर्फ एक क्षेत्र में फैली होती है।
- स्टेज 2 और 3 : आपके शरीर के ट्यूमर का आकार बड़ा हो जाता है और कैंसर की कोशिकाएं अपने पास के स्थित अंगों और लिम्फ नोड्स में फैल जाती हैं।
- स्टेज 4: चौथे चरण में कैंसर अपने आखिरी स्टेज में होता है। इसे मेटास्टेटिक कैंसर भी कहा जाता है। यह स्टेज जानलेवा साबित हो सकता है। इसमें कैंसर दूसरे अंगों तक फैल चुका होता है।
कैंसर के कुछ प्रकार (Types of Cancer)
ब्लड कैंसर (Blood Cancer)
आमतौर पर सबसे ज्यादा ब्लड कैंसर होता है। इस टाइप के कैंसर में व्यक्ति के शरीर की रक्त कोशिकाओं में कैंसर जन्म ले लेता है। इससे शरीर में खून की भी कमी हो जाती है। ब्लड कैंसर तेजी से पूरे शरीर में फैल जाता है।
लंग्स कैंसर (Lungs Cancer)
फेफड़ों का कैंसर इसे लंग्स कैंसर भी कहते हैं। इसमें मरीज को सांस लेने में समस्या होती है। इससे बलगम जमना, हड्डियों-जोड़ों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और भूख ना लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
स्किन कैंसर (Skin Cancer)
हाल ही के कुछ समय में स्किन कैंसर के मामले काफी ज्यादा आ रहे हैं। गर्मी के मौसम में स्किन कैंसर ज्यादा होता है। इसके अलावा अच्छा भोजन न करने के कारण भी ये कैंसर पैदा हो सकता है।
ब्रेन कैंसर (Brain Cancer)
व्यक्ति के सिर में ब्रेन कैंसर पैदा होता है, जिसे ब्रेन ट्यूमर भी कहते हैं। पीड़ित व्यक्ति के दिमाग वाले भाग में एक गांठ बन जाती है, जो समय के साथ बढ़ने लगती है। फिर यह पूरे दिमाग में जगह बना लेती है।
स्तन कैंसर (Breast Cancer)
स्तन कैंसर को ब्रेस्ट कैंसर भी कहते हैं। यह महिलाओं में ज्यादा होता है। इस टाइप के कैंसर में महिलाओं के स्तन में एक गांठ बन जाती है, जो समय से बढ़ती जाती है। इसमें काफी ज्यादा दर्द महसूस होता है।
मुंह का कैंसर (Mouth Cancer)
यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें मुंह के अंदर के tissues में असामान्य और अनियंत्रित कोशिका वृद्धि होती है। मुंह का कैंसर होने के लिए सिर्फ नशीले पदार्थों का सेवन ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि HPV संक्रमण, खराब ओरल हाइजीन, दांतों की समस्या, दांतों में लम्बे समय तक घाव या जलन होना, पोषक तत्वों की कमी और आनुवंशिकी जिम्मेदार है।
लिवर कैंसरः (Liver Cancer)
खानपान में गड़बड़ी या लिवर में बीमारी होने के कारण यह कैंसर हो जाता है। इससे लिवर में कैसर की कोशिकाएं पैदा होती हैं, जो धीरे धीरे लिवर को खत्म कर देती हैं।
बोन कैंसर (Bone Cancer)
ये कैंसर हड्डियों में पैदा होता है। कई बार हड्डियों में चोट लगने के कारण या पुरानी चोट के कारण भी बोन कैंसर पैदा हो जाता है।
कैंसर के मुख्य लक्षण (Symptoms of Cancer)
- शरीर के किसी अंग में असामान्य सूजन का होना
- तिल या मस्सों के आकार या रंग में परिवर्तन
- लगातार बुखार या वजन में कमी, घाव का लंबे समय तक नहीं भरना
- चार हफ्ते से अधिक समय तक अकारण दर्द का रहना
- मूत्र विसर्जन में कठिनाई या दर्द का होना
- शौच से रक्त निकलना
- चार हफ्ते से अधिक समय तक अकारण दर्द रहना
- स्तन में सूजन या कड़ापन का होना
- तीन सप्ताह से अधिक लगातार खांसी या आवाज का कर्कश होना
- असामान्य रक्त प्रवाह या मासिक धर्म के बाद भी योनी से रक्त का निकलना
सभी कैंसर के लक्षण एक-दूसरे से अलग होते हैं। ऐसे में इसके संकेतों और लक्षणों (symptoms of cancer) के बारे में हर किसी को जानकारी होनी चाहिए, ताकि समय रहते लक्षणों को पहचानकर निदान और इलाज शुरू की जा सके। कैंसर के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:-
- अचानक वजन कम होना (Unexplained weight loss) : बिना कोई कारण नजर आए यदि आपका वजन तेजी से कम होने लगे, तो यह कैंसर के पहले संकेतों में से एक हो सकता है। अग्न्याशय (pancreas), पेट (Stomach cancer) या फेफड़ों में होने वाले कैंसर (Lung cancer) से पीड़ित लोगों में वजन कम होने की समस्या होती है। हालांकि, अन्य प्रकार के कैंसर से पीड़ित लोगों में भी वजन कम हो सकता है।
- अत्यधिक थकान (Extreme fatigue) : सारा दिन थकान महसूस होना भी कैंसर के महत्वपूर्ण लक्षणों में शामिल है। ल्यूकेमिया (Leukemia), कोलन कैंसर (Colon cancer) होने पर थकान अधिक महसूस होती है।
- गांठ (Lump) : त्वचा में किसी भी तरह की गांठ या लम्प नजर आए, तो संभवत: यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। स्तन कैंसर, लिम्फ नोड्स, सॉफ्ट ऊतक और अंडकोष (Testicles) में होने वाले कैंसर में आमतौर पर गांठ होते हैं।
- त्वचा में बदलाव (Changes in the skin) : यदि आपकी त्वचा का रंग बदलकर पीला, काला या लाल हो गया है, तो ये कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही शरीर के किसी भी हिस्से पर हुए मोल्स या मस्से के रंग और आकार में बदलाव नजर आए, तो इसे नजरअंदाज ना करें। इस बात पर भी गौर करें कि कोई भी घाव ठीक होने में अधिक समय तो नहीं ले रहा है।
- तेज दर्द (Acute pain) : तीव्र दर्द आमतौर पर हड्डी या वृषण कैंसर (Bone Cancers Or Testicular Cancer) का शुरुआती लक्षण हो सकता है, जबकि पीठ दर्द कोलोरेक्टल (colorectal), अग्नाशय (pancreatic) या डिम्बग्रंथि के कैंसर (ovarian cancer) के संकेत होते हैं। जिन लोगों को मैलिग्नेंट ब्रेन ट्यूमर होता है, उनमें तेज सिरदर्द होने की शिकायत रहती है।
- बाउल मूवमेंट और ब्लैडर फंक्शन में बदलाव: कब्ज, दस्त, मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत हो सकते हैं। पेशाब करते समय दर्द के साथ खून आना ब्लैडर (bladder cancer) और प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer) के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
- लिम्फ नोड्स में सूजन (Swelling in lymph nodes) : तीन से चार सप्ताह तक ग्रंथियों में सूजन (Swollen glands) बने रहना ठीक नहीं। लिम्फ नोड्स के आकार में वृद्धि भी कैंसर का संकेत होती है।
एनीमिया (Anemia) : एनीमिया होने पर लाल रक्त कोशिका में भारी कमी आ जाती है। यह हेमटोलॉजिकल कैंसर का संकेत (haematological cancers) हो सकता है।
कैंसर के सामान्य कारण (General Reason of Cancer)
कैंसर क्यों होता है, इसके पीछे कोई ज्ञात कारण नहीं है। हालांकि, कुछ कारक कैंसर होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं। हमें इस घातक स्थिति से खुद को बचाने के लिए संभावित कार्सिनोजेनिक कारकों (carcinogenic factors) के संपर्क में आने से बचना होगा। हालांकि, अनुवांशिक कारणों से होने वाले कैंसर को रोकना हमारे बस में नहीं है, जो कैंसर होने का एक प्रमुख जोखिम कारक है। बावजूद इसके, जिनके परिवार में कैंसर होने का इतिहास है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए। इससे कैंसर का पता जल्दी चलने से उपचार भी समय रहते शुरू किया जा सकता है। कुछ प्रमुख कारक, जो कैंसर होने की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं:-
तंबाकू चबाना या सिगरेट पीना (Chewing tobacco or smoking cigarettes) :
इन चीजों में मौजूद निकोटीन के सेवन से शरीर के किसी भी अंग में कैंसर हो सकता है। तंबाकू और धूम्रपान करने से आमतौर पर मुंह का कैंसर (Mouth cancer), फेफड़ों का कैंसर (lung cancer), एलिमेंटरी ट्रैक्ट (alimentary tract) और पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic cancer) होने का खतरा बढ़ जाता है।
जीन (Genes) :
परिवार में यदि कैंसर होने की हिस्ट्री है, तो इस खतरनाक बीमारी के होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। कैंसर एक दोषपूर्ण जीन के कारण भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर (Breast Cancer), वंशानुगत गैर पॉलीपोसिस कोलोरेक्टल कैंसर (Hereditary Non Polyposis Colorectal Cancer) आदि वंशानुगत (Hereditary) हो सकते हैं।
पर्यावरण में कार्सिनोजेन्स का होना (Carcinogens in the environment) :
हम जो कुछ भी खाते या पीते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उनमें कई ऐसे तत्व या पदार्थ मौजूद होते हैं, जो कैंसर होने की जोखिम को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। एज्बेस्टस (Asbestos), बेंजीन (Benzene), आर्सेनिक (Arsenic), निकल (Nickel) जैसे कम्पाउंड फेफड़े के कैंसर (Lung cancer) के अलावा कई अन्य कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाते हैं।
फूड्स (Foods) :
आजकल अधिकतर फल और सब्जियां कीटनाशकों से दूषित होते हैं, जिनके सेवन से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दोबारा गर्म किए गए भोजन, अधिक पके हुए फूड्स, दोबारा गर्म किए गए तेल कार्सिनोजेनिक (Carcinogenic) हो जाते हैं। कल-कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों की वजह से प्रदूषित जल भी काफी नुकसानदायक होता है, क्योंकि इसमें भारी खनिजों (Heavy minerals) की मात्रा अधिक होती है।
वायरस (Virus):
हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लिवर कैंसर (Liver cancer) के लिए 50 प्रतिशत तक जिम्मेदार होते हैं, जबकि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus) 99.9% मामलों में सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) होने के लिए जिम्मेदार होता है। साथ ही, रेडिएशन और सन एक्सपोजर भी कैंसर के जोखिम को काफी हद तक बढ़ाते हैं।
कैंसर के लिए उपचार (Treatment of Cancer)
- सर्जरी
- विकिरण थेरेपी
- कीमोथेरेपी
- इम्यूनोथेरेपी
- लक्षित दवा थेरेपी
- हार्मोन थेरेपी
- बायोसिमिलर दवाएं
- त्वचा के कैंसर के उपचार नैदानिक परीक्षण
डॉक्टर कैंसर के प्रकार, स्थान या अवस्था के आधार पर इलाज का विकल्प (Cancer treatment) तय कर सकता है। आमतौर पर, कैंसर के उपचार में मुख्य रूप से सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट्स शामिल हैं।
सर्जरी (Surgery)
डॉक्टर सर्जरी के जरिए कैंसर के ट्यूमर, ऊतकों, लिम्फ नोड्स या किसी अन्य कैंसर प्रभावित क्षेत्र को हटाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी डॉक्टर बीमारी की गंभीरता का पता लगाने के लिए भी सर्जरी करते हैं। यदि कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में नहीं फैला है, तो सर्जरी इलाज का सबसे अच्छा विकल्प है।
कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
कीमोथेरेपी को कई चरणों में किया जाता है। इस प्रक्रिया में ड्रग्स के जरिए कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है। हालांकि, उपचार का यह तरीका किसी-किसी के लिए काफी कष्टदायक होता है। इसके कई साइड एफेक्ट्स भी नजर आते हैं, जिसमें बालों का झड़ना मुख्य रूप से शामिल है। दवाओं को खाने के साथ ही नसो में इंजेक्शन के जरिए भी पहुंचाया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी (Radiation therapy)
रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं पर सीधा असर करता है और उन्हें दोबारा बढ़ने से रोकता है। इस प्रक्रिया में, उच्च ऊर्जा कणों (high-energy particles) या तरंगों (Waves) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की कोशिश की जाती है। कुछ लोगों को इलाज में सिर्फ रेडिएशन थेरेपी तो किसी-किसी को रेडिएशन थेरेपी के साथ सर्जरी और कीमोथेरेपी भी दी जाती है।
इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
इम्यूनोथेरेपी आपके शरीर के डिफेंस सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में सक्षम बनाती है।
हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy)
इस थेरेपी का उपयोग उन कैंसर के उपचार के लिए किया जाता है, जो हार्मोन से प्रभावित होते हैं। हार्मोन थेरेपी से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर में काफी हद तक सुधार होता है।
कैंसर से बचाव के उपाय (Prevention of Cancer)
- 1. अपने परिवार के स्वास्थ्य इतिहास को जानें और अनुशंसित कैंसर जांच करवाएं
- 2. तम्बाकू का प्रयोग न करें
- 3. अपनी त्वचा को धूप से बचाएं
- 4. पौधे आधारित आहार खाएं
- 5. शराब से बचें या सीमित मात्रा में पिएं
- 6. स्वस्थ वजन बनाए रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
- 7. सुरक्षित सेक्स करें और जोखिम भरे व्यवहार से बचें
- 8. एचपीवी और हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीका लगवाएं
क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले अनेक विकल्प कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं?
शोध से पता चलता है कि आज हमारे पास जो ज्ञान उपलब्ध है, उससे 50% तक कैंसर के मामलों और लगभग 50% कैंसर से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। यहां कैंसर के जोखिम को कम करने या कैंसर का शीघ्र पता लगाने के आठ तरीके बताए गए हैं, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
1. अपने परिवार के स्वास्थ्य इतिहास को जानें और अनुशंसित कैंसर जांच करवाएं
अपने परिवार के स्वास्थ्य इतिहास को अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ साझा करें और कैंसर जांच के बारे में चर्चा करें। कुछ परीक्षण कैंसर का जल्दी पता लगाने में मदद कर सकते हैं, जब उपचार सफल होने की अधिक संभावना होती है, और कुछ कैंसर बनने से पहले ही कैंसर से पहले की स्थितियों का पता लगा सकते हैं। जबकि स्क्रीनिंग से जान बचाने में मदद मिली है, स्क्रीनिंग दिशा-निर्देश “सभी के लिए एक ही आकार के” नहीं हो सकते हैं।
2. तम्बाकू का प्रयोग न करें
तम्बाकू का सेवन (सिगरेट, सिगार, हुक्का, चबाने वाला तम्बाकू और अन्य) कई प्रकार के कैंसर से जुड़ा हुआ है, जिसमें फेफड़े, कोलोरेक्टल, स्तन, गले, गर्भाशय ग्रीवा, मूत्राशय, मुंह और ग्रासनली के कैंसर शामिल हैं। तम्बाकू का सेवन कभी भी शुरू न करना सबसे अच्छा है, लेकिन अगर आप तम्बाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं, तो इसे छोड़ने में कभी देर नहीं होती। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, सिगरेट पीने की दर अमेरिका में 2014 में ऐतिहासिक रूप से कम हो गई थी 2021हालांकि, धूम्रपान अभी भी सभी कैंसर से होने वाली मौतों में से लगभग 30% के लिए जिम्मेदार है। सभी फेफड़ों के कैंसर में से लगभग 80%-90% सिगरेट पीने से संबंधित हैं।
धूम्रपान न करने वाले लोग जो सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आते हैं, उन्हें फेफड़े और अन्य प्रकार के कैंसर के साथ-साथ अन्य बीमारियों का भी खतरा होता है। ई-सिगरेट भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है और लत का कारण बन सकती है या अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में काम कर सकती है।
3. अपनी त्वचा को धूप से बचाएं
त्वचा कैंसर सबसे आम कैंसर निदान है और यह सबसे अधिक रोकथाम योग्य कैंसर में से एक है। सूर्य की पराबैंगनी विकिरण के संपर्क में आने से अधिकांश त्वचा कैंसर होते हैं। पूरे वर्ष पर्याप्त धूप से बचाव का उपयोग करना सुनिश्चित करें। कभी भी इनडोर टैनिंग बेड का उपयोग न करें।
4. पौधे आधारित आहार खाएं
खूब सारे फल, सब्जियां, बीन्स और साबुत अनाज खाएं, लाल मांस और नमक वाली चीज़ें कम खाएं और प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम करें। अतिरिक्त चीनी वाले पेय पदार्थों से बचें। 2021 में किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि हर दिन तीन सर्विंग सब्जियां (आलू जैसी स्टार्च वाली नहीं) और दो सर्विंग फल (जूस नहीं) खाने से कैंसर से मृत्यु का जोखिम 10% कम होता है।
5. शराब से बचें या सीमित मात्रा में पिएं
शराब पीने से कई तरह के कैंसर होते हैं, जिनमें स्तन, कोलोरेक्टल, एसोफैजियल, ओरल और लिवर कैंसर शामिल हैं। कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए, शराब से पूरी तरह से दूर रहना सबसे अच्छा है। अगर आप शराब पीना चुनते हैं, तो अगर आप जन्म के समय महिला थे, तो अपने पीने को दिन में एक ड्रिंक से ज़्यादा न करें और अगर आप जन्म के समय पुरुष थे, तो दिन में दो ड्रिंक से ज़्यादा न पिएं। आप जितना ज़्यादा शराब पीते हैं, कैंसर का जोखिम उतना ही ज़्यादा होता है। शराब की थोड़ी मात्रा भी आपके जोखिम को बढ़ा सकती है।
6. स्वस्थ वजन बनाए रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
मोटापा कई कैंसर से जुड़ा हुआ है, जिसमें एंडोमेट्रियम, लीवर, किडनी, अग्न्याशय, बृहदान्त्र और स्तन (विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में) के कैंसर शामिल हैं। सप्ताह में पांच दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करना आपके सामान्य स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद कर सकता है। ज़्यादा चलना और कम बैठना अपनी प्राथमिकता बनाएं। उदाहरण के लिए, अगर आप अपना ज़्यादातर समय काम के दौरान डेस्क पर बैठकर बिताते हैं, तो हर घंटे उठने और घूमने का कोई तरीका ढूंढ़ें। शारीरिक गतिविधि कोलोरेक्टल, स्तन और एंडोमेट्रियल कैंसर के कम जोखिम से जुड़ी हुई है, और कुछ सबूत हैं जो इसे अन्य कैंसर के जोखिम को कम करने से भी जोड़ते हैं। तनाव कम करने, ऊर्जा बढ़ाने, अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने, अपने वजन को नियंत्रित करने और कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करें।
7. सुरक्षित सेक्स करें और जोखिम भरे व्यवहार से बचें
ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) के कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर, ऑरोफरीन्जियल कैंसर (गले के पिछले हिस्से का कैंसर, जीभ और टॉन्सिल के आधार सहित) और कम से कम चार अन्य प्रकार के कैंसर का कारण बन सकते हैं। चूंकि HPV योनि, गुदा या मुख मैथुन के माध्यम से फैलता है, इसलिए हर बार सेक्स करते समय सही तरीके से कंडोम का उपयोग करने से आपको सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन यह 100% सुरक्षित नहीं है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस सेक्स या रक्त के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं (उदाहरण के लिए, इंजेक्शन ड्रग के उपयोग के लिए सुइयों और सीरिंज को साझा करके)। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस लंबे समय तक लीवर संक्रमण का कारण बन सकते हैं जो आपके लीवर कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ा सकते हैं। हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी और लीवर कैंसर के अपने जोखिम को कम करने के लिए जोखिम भरे व्यवहार से बचें और सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करें।
8. एचपीवी और हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीका लगवाएं
टीका लगवाने से आप कैंसर से जुड़े कुछ वायरस से बच सकते हैं। इनमें से एक वायरस HPV है। सभी बच्चों को 9-12 वर्ष की आयु के बीच HPV के खिलाफ टीका लगवाना चाहिए, और बड़े किशोर और युवा वयस्क (13-26 वर्ष की आयु) जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है, वे "कैच-अप" टीकाकरण श्रृंखला प्राप्त कर सकते हैं। अमेरिका में, अधिकांश यकृत कैंसर हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी से जुड़े होते हैं। हेपेटाइटिस बी का टीका उपलब्ध है और 59 वर्ष की आयु तक के सभी वयस्कों के लिए अनुशंसित है, साथ ही 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों के लिए भी जिन्हें हेपेटाइटिस बी संक्रमण का उच्च जोखिम है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी दोनों के लिए परीक्षण और उपचार उपलब्ध हैं।
कैंसर से लड़ने वाले शीर्ष 4 प्रभावी खाद्य पदार्थ (Top 4 Effective Cancer Fighting Foods)
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ आहार कैंसर से बचने की संभावना को बढ़ा सकता है। चूंकि भोजन एक ऐसी चीज़ है जिसे लोग दिन में कई बार खाते हैं, इसलिए नीचे बताए गए खाद्य पदार्थों से भरपूर आहार का शरीर पर लगातार प्रभाव पड़ता है।
कैंसर से लड़ने वाले शीर्ष पांच खाद्य पदार्थों को रोगी के आहार में शामिल किया जाना चाहिए।
1.पत्तेदार सब्जियां (Leafy Vegetables)
चुकंदर, मूली, गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और सरसों के पत्ते कुछ ऐसी सब्जियां हैं जो ब्रैसिकेसी परिवार की सब्ज़ियों से संबंधित हैं। -क्रूसिफेरस सब्ज़ियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जिनमें विभिन्न कैरोटीनॉयड (बीटा-कैरोटीन, ल्यूटिन, ज़ेक्सैंथिन); विटामिन सी, ई और के; फोलेट और -खनिज शामिल हैं। इनमें फाइबर भी होता है।
इसके अलावा, क्रूसिफेरस सब्जियों में सल्फर युक्त यौगिकों का एक समूह शामिल होता है जिसे ग्लूकोसाइनोलेट्स के रूप में जाना जाता है। ये यौगिक क्रूसिफेरस सब्जियों की तेज गंध और कड़वे स्वाद के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।
2. हरे पत्ते वाली सब्जियां (Green Vegetables)
इनमें एंटीऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा-संशोधक गुण भी होते हैं। फोलेट डीएनए संश्लेषण और मिथाइलेशन के लिए आवश्यक है और विशेष रूप से तेजी से बढ़ने वाले ऊतकों के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
कैंसर की रोकथाम के लिए, फोर्टिफिकेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले अधिक स्थिर फोलिक एसिड की तुलना में आहार फोलेट बेहतर हो सकता है।
विभिन्न हरी सब्जियों में से पालक और पेरीला का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया गया है। पालक में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं और इसके ग्लाइकोलिपिड अंश कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को रोकते हैं ।
3. लहसुन (Garlic)
लहसुन (एलियम सैटिवम एल) सबसे पुराने पौधों में से एक है, जिसे इसके आहार और औषधीय गुणों के लिए उगाया जाता है। यह अद्भुत पौधा विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर है जैसे कि एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-आर्थ्राइटिक, एंटीथ्रोम्बोटिक, एंटी-ट्यूमर, हाइपोग्लाइसेमिक और हाइपोलिपिडेमिक गतिविधियां।
लहसुन के विभिन्न लाभकारी औषधीय प्रभावों में से, इसकी कैंसर विरोधी गतिविधि संभवतः सबसे अधिक अध्ययन की गई है। लहसुन का सेवन कैंसर के जोखिम के खिलाफ शक्तिशाली सुरक्षा प्रदान करता है।
बहुलक्ष्यीय प्रभावों और महत्वपूर्ण विषाक्तता की कमी को देखते हुए, यह संभावना है कि लहसुन के कुछ सक्रिय मेटाबोलाइट्स कैंसर कोशिकाओं को मारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लहसुन में कैंसर रोधी गुणों वाले कई जैवसक्रिय अणु होते हैं, जिनमें डायलिल ट्राइसल्फाइड, एलिसिन, डायलिल डाइसल्फाइड, डायलिल सल्फाइड और एलीलमर्कैप्टन शामिल हैं।
लहसुन, इसके फाइटोकंपाउंड्स और नैनोफॉर्मूलेशन से प्राप्त विभिन्न उत्पादों के प्रभावों का मूल्यांकन किया गया है
लहसुन का अर्क, इसके फाइटोकंपाउंड और इसके नैनोफॉर्मूलेशन कैंसर के विभिन्न चरणों को रोकने में कारगर साबित हुए हैं, जिसमें कैंसर की शुरुआत, उसका बढ़ना शामिल है।
लहसुन में मौजूद ऐलीसिन नामक सूजनरोधी तत्व ट्यूमर में रक्त की आपूर्ति को बंद करने के लिए जाना जाता है। इसमें ट्रिप्टोफैन, सेलेनियम और सल्फर पर आधारित सक्रिय तत्व होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
4. टमाटर (Tomato)
इनमें लाइकोपीन (एक प्रकार का कैरोटीनॉयड) अधिक मात्रा में होता है, जो टमाटर के लाल रंग के लिए जिम्मेदार होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि लाइकोपीन प्रोस्टेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को रोकने में मदद कर सकता है।
यह शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करके और रक्तचाप को कम करके हृदय रोग के जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकता है।
इसके अलावा, कुछ सबूत हैं कि लाइकोपीन के सेवन को बढ़ाने से अग्न्याशय, मलाशय, ग्रासनली, मौखिक गुहा, स्तन और गले के कैंसर को कम किया जा सकता है। लाइकोपीन एक वसा में घुलनशील यौगिक है, जिसका अर्थ है कि वसा (तेल) के साथ इसका सेवन करने से इसकी जैव उपलब्धता बढ़ जाती है। इसलिए, यदि आप अपने सलाद में ताजे टमाटरों को कम वसा वाले ड्रेसिंग के बजाय पूर्ण वसा वाले ड्रेसिंग के साथ मिलाते हैं, तो आपको उससे अधिक लाइकोपीन मिलेगा।
कैंसर (Cancer) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQS)
1. कैंसर कितने प्रकार का होता है? (What are the Types of Cancer?)
कैंसर कई प्रकार के होते हैं जैसे ब्लड कैंसर, बच्चेदानी का कैंसर, लंग कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ब्लैडर कैंसर, लिवर कैंसर, बोन कैंसर, पेट का कैंसर, गले का कैंसर, मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, और अग्नाशय का कैंसर आदि।
2. कैंसर से कैसे बचें? (How to Avoid Cancer?)
धूम्रपान, तम्बाकू, सुपारी, पान- मसाला, गुटका और शराब आदि का सेवन नहीं करें और पौष्टिक भोजन खायें। वहीं, कीटनाशक एवं रसायन से युक्त फल को धोकर खायें। अधिक तलें, भुने, बार-बार गर्म किए तेल में बने और अधिक नमक में सरंक्षित भोजन न खाएं। इसके अलावा अपना वजन सामान्य रखें। प्रतिदिन कसरत करें। वहीं, साफ-सुथरे, प्रदूषण रहित वातावरण में रहें। शरीर में या स्वास्थ्य में किसी भी असामान्य परिवर्तन को अधिक समय तक न पनपने दें। ऐसा होने पर तुरन्त चिकित्सक से सम्पर्क करें।
3. कैंसर होने के संभावित कारण क्या-क्या होते हैं? (What are the Possible Causes of Cancer?)
धूम्रपान-सिगरेट या बीड़ी के सेवन से मुंह, गले, फेंफडे, पेट और मूत्राशय का कैंसर होता है। वहीं, तम्बाकू, पान, सुपारी, पान मसालों, एवं गुटकों के सेवन से मुंह, जीभ खाने की नली, पेट, गले, गुर्दे और अग्नाशय (पेनक्रियाज) का कैंसर होता है। इसके अलावा, शराब के सेवन से श्वांस नली, भोजन नली, और तालु में कैंसर होता है। वहीं, कम उम्र में शारीरिक सम्बन्ध और अनेक पुरूषों से शारीरिक सम्बन्ध द्वारा बच्चेदानी के मुंह का कैंसर होता है।
4. कैंसर का पता कैसे चलता है?
किसी भी व्यक्ति को यदि कैंसर हो जाता है, तो उसमें कई लक्षण दिखते हैं। वहीं, इसके शुरुआती लक्षणों में पेट दर्द, खाने के बाद ब्लोटिंग, पेट में सूजन, डकार, पाचन की समस्या और हार्टबर्न हैं। एडवांस स्टोमक कैंसर के लक्षण मल में खून आना, भूख खत्म हो जाना, अचानक से वजन घटना आदि हैं। हालांकि, अग्नाश्य कैंसर के शुरुआती स्टेज में लक्षण ज्यादा स्पष्ट नहीं होते हैं जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
5. कैंसर की कितनी स्टेज होती हैं? (What are the Stage of Cancer?)
कैंसर एक ऐसी समस्या है, जिसके बारे में यदि शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो छुटकारा पाया जा सकता है। वहीं, कैंसर के 5 स्टेज होते हैं- स्टेज 0, स्टेज 1, स्टेज 2, स्टेज 3 और स्टेज 4। लंग कैंसर के 4 स्टेज को व्यापक स्टेज (एक्सटेंसिव स्टेज) कैंसर भी कहा जा सकता है। वहीं यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लिम्फ सिस्टम या ब्लडस्ट्रीम (Lymphatic System or Bloodstream) के जरिए से फैलता है।
6. कैंसर के लिए कौन-सा टेस्ट होता है? (Which Test is Used for Cancer?)
अभी कैंसर का पता लगाने के लिए अलग-अलग तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इनमें सीटी स्कैन, MRI, अल्ट्रासाउंड, लैब टेस्ट और कई तरीके के अलग-अलग टेस्ट शामिल हैं।
अगर आप कैंसर के लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो आज ही अपोलो सेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी नंबर 0755- 3505050 पर डॉक्टर से उचित सलाह लें।
निष्कर्ष
शारीरिक लक्षणों और संकेतों को देखते हुए डॉक्टर कैंसर का पता लगाने की कोशिश करते हैं। आपकी मेडिकल हिस्ट्री को देखने के बाद शारीरिक परीक्षण की जाती है। टेस्ट के लिए मूत्र (Urine), रक्त (Blood) या मल (Stool) का सैंपल लिया जाता है। कैंसर की आशंका होने पर एक्स-रे, कंप्यूटेड टोमोग्रैफी (computed tomography), एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और फाइबर-ऑप्टिक एंडोस्कोपी परीक्षणों से आपको गुजरना पड़ सकता है। इन सभी टूल्स के जरिए डॉक्टर आसानी से ट्यूमर के स्थान और आकार के बारे में जान पाते हैं।

